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Archive for मई, 2008

मैं ने रबड् बोर्ड से 2006-07 की निर्यात के बारे में जानकारि हासिल करने की कोशिश की। परंतू मुझे बेवकूफ बना दिया। मैं उन से निर्यात के दिन, निर्यात करने वाले का नाम, निर्यात कीगये वजन, रबड् की किसम (आरऎसऎस षीट, लाटेक्स, ऐऎसऎनआर आदि), किस देश को भेजा, निर्यात की मूल्य आगी माँगा था। पहले उन्होंने जवाब दी कि सारे निर्यात के दिन उपलब्द नहीं, रजिस्टरों में लिपिबद्ध की हैं, और कई सौ पन्नों में एक साल के निर्यात चालू हैं।ङर आयात करने वालों से हर महीने की रिपोर्ट इकटा करते हैं, माँगा गया format में देने केलिये बहूत ज़्यादा भारी काम करना पडेगा, वह disproportionately divert the resources of the office, और माँग मान नहीं सकता। छः रुपये भेजने कि निरदेश पर तीन पन्ने हासेल हुआ।

माँगा गया सारे साराँश न मिलने का कारण Appellate authority को पहला अपील भेजने पर 4 March 2008 को एक हुक्म दी गई। वह यह था “he shall be satisfied if copies of those pages of data lying at various files and registers are made available to him as such so that he can compile them to arrive at the published figures; how many the number of those pages be”. साथ ही पब्लिक इनफरमेषन ओफीसर को 350 पन्ने पाने केलिये दो रुपया पन्ने की हिसाब से भेजने की निर्देश दिया। एप्रिल चार तारिख को 360 पन्ने मिले जिसमें RTI Act की बदनाम की गई। ऐसे पन्ने दी एक ही पन्ने की दो copy, शून्य पन्ने, Covering letters के copy वगैरा जोडकर दिया गया हैं। आगस्ट 2006 को पाला मारक्कटिंग को-ओपरेटीव सॊसैटी ने 2.13 रु में 893000 किलो आरऎसऎस 4 निर्यात किया हैं करके दिखा रहे हैंं जब की यहाँ के दाम 91.82 रु थे। इतने कम दामों में निर्यात कैसे हो सकते हैं?

यही बात अंग्रेजी में प्राप्त हैं।

पाला मारक्कटिंग को-ओपरेटीव सॊसैटी की निर्यात २००६ आगस्ट महीने की यह हैं।क्या भारत के रबड् प्रोडक्ट निरमाताों कि मत भी यही हैं ?

रबड् के बारे में विस्त्रृत जानकारि केलिये यहाँ देखें

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