June 7, 2007 by चन्द्रशेखरन नायर
सारे दुनियाँ में सम्पत्ती की लभ्यता पर भारत १२ स्थान पर पहूँचा हैं। उसकेलिये किसानों को कर्जेदार और गरीब रखना पडरहा हैं। रुपये की दाम उँचा रखनेकेलिये खाने पीने की चीजों का दाम कम रखना जरूरी हैं। उसकेलिये खेतों में उगलनेवाले धान्य की दाम कम रखने पर बेरोजगारी सरपर लेली हैं। उसी उद्देश प्राप्त करनेकेलिये तेल, गेहू आदि चीजों के आयात कर रहे हैं। बान्कों (Banks) की मुनाफा बडाने केलिये जमीन की documents जमा करके कर्ज या उदार देकर हुद्खुशी (suicide) करने केलिये मजबूर कर रहे हैं। विदर्फा में ८ घंटे में एक हुद्खुशी प्रधानमंत्री के पाकेज से पहले होता था अब ४ घंटे में एक हो गया। किसानों को मुनाफा होना कयी सालों से मना हैं।
किसानों को सपना देखने केलिये क्या क्या वादायें, तरीके, सुविधायें, बजट में भारि रकम वगैरा दिखाकर इस देश को सम्पन्न करने में केन्द्र सर्कार की तरफ से बहूत कुच्छ कर रहे हैं। घाटे में खेती कितने किसानों को कर सकेगा? अगर खेती की हाल कुच्छ साल यही होगा तो हमें खाने पीनेकेलिये सब्कुच्छ आयात करना पडेगा। किसान उत्पादक (producer) और consumer भी है। ऐसे हालात में सब्जी, चावल, गेहू आदि चीजों की सही दाम की लभ्यता चाह्ते हैं तो खाने पीने की चीजों की आयात बंद करना ही अच्छा होगा। किसानों के नाम पर आँसू बहाने से कोई भी कठिनाई हल नहीं होगा। नारियल की तेल, पाँऒइल, सोयाबीन तेल वगैरह आयात करके सरसों, नारियल, मुम्फल्ली, सूरज मुखी आदि खेतियों के विनाश होरहा हैं। Agri business किसानों को लूट्नेकेलिये हैं।
जमीन की बर्बादी soil testing laboratories कर रहा है। एन.पि.के के जाँच और इस्तेमाल acidic soil बनाकर पौदों, पशु पक्षियों और इन्सान को बीमारियाँ प्रदान कर रहे हैं। रासायनिक एन (नैट्रग्न) जमीन की इसतेमाल pH कम होने और पेड पौधों को भूखा मारते हैं। secondary neutrients & trace elements के काम इन्को मालूम नहीं है क्या? जहरें झिडक कर जमीनि कीडाओं (earth worms) को मार दी और पीने की पानि भी बर्बाद करदी। दिन पर दिन कई किसम के बीमारियाँ फैल रहे है और इलाज मेहगा भी पडरहा हैं।
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मैं ने कुच्छ साल पहले एक ड्रैयर का जोनकारी किसानों को दी। उसे अंग्रेजी नें छापी थी। कम खरचे में कारषिक उत्पन्न को सुखाने की यह सुविधा मैं किसानों के बीच मुफ्त में बांटना चाहता हँं। कोइ मुझे हिन्दी में अनुवाद करके देगा तो सब हिन्दी जाननेवालों को कीमती होगी।
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April 22, 2007 by चन्द्रशेखरन नायर
किसानों आप लोग सोरहा हैं क्या ? अब समय आगया जागने का। जो खाने पीने की दाम बढजायेगा तो रुपये का मूल्य कम होजायेगा । उस वजह से सबजी, चावल, गेहू आदी चीजों की दाम बढने से रोकने की केशिश चारों तरफ से हो रहा हैं। sharemarket की इन्डेक्स बढें, जाली रुपया फैलें(जो नहीं होना चाहिए), सरकारी कर्मचारियों के धनका बढें, बेंकों (Banks) में पैसा deposit ज्यादा होजायें तो रुपये की मूल्य बढ जायेगी और डोलर (dollar) की दाम कम होजायेगा। सरकारी कर्मचारियों को पिछले 23 साल से धनका दस दशमल पाँच गुणा बडगया, खेतों में काम करने वाले मजदूर का भी दस गुणा बढा लेकिन सबजी, गेहू या चावल की दाम में कितना बढोत्री हुआ ? मेरा पेनषन (pension) 1985 में 372 था तो अब 3100 करीब हैं। जब मेरा DA बढेगा तब essential comodities में खाने पीने की चीजों को प्रथम स्थान हैं क्या ?
जब रुपये की मूल्य कम होजायेगा विदेशों में काम करनेवाला पैसा हिन्दुस्तान में भेजकर उनको ज्यादा कमाई हो जायेगा। जब रुपया की मूल्य बढेगा उनके कमाई कम हो जयेगा। इस का मतलब यह हैं कि खाद्य सामग्रियों का दाम बढेगा तो किसानों और विदेश में काम करनेवालों को मुनाफा होगा। परन्तू हमारा देश यह नहीं चाहता। Agricultural produces की दाम कम रहें और बिना टाक्स या ड्यूटी की आयात निर्यात (Export Import) कर सके यही हमारे सरकार की कओशिश हैं या WTO का दबाव जारी हैं। भारी रकम सब्सिडी देकर चीनी का निर्यात गन्ने किसानों को मदद करने केलिले हैं क्या ? नहिं यह सब कुच्छ मध्यवर्ती (Middlemen) को मदद करने केलिये ही हैं। रबर आयात केलिये ‘ तायलन्ट ‘ से समझोदा (agrement) करके रबर बोर्ड की चेयरमान किसानों को मदद करने केलिये निर्यात करनेवालों को इक्कटा कर रहे हैं। आदरणीय कमलनाथ जी बोलता हैं कि भारत में रबर की कमी हैं और चेयरमान बोलते हैं कि रबर दिसंबर 31 तारिक को 1,41,000 टणें (Tonnes) ज्यादा स्टोक हैं।
खेती करके घाटे या भारी कर्ज की कारण किसान आत्महत्या (Suicide) करें तो भी कोई बात नहीं। खून पशीना बहाकर जो जमीन से पैदा करके कम या सस्ते दामों में सफेद कोलर (white collar) कर्मचारियों को खिलाना पिलाना किसानों के कर्तव्य हैं क्या ? किसान भी किसानों के खिलाफ हैं। अपने पैदा किया हुआ चीजों का ही सही दाम चाहते हैं। दूसरों के पैदा किया हुआ चीजें सस्ते में खरीदना ही चाहता हैं। अगर एक किसान दूसरे का पैदा किया हुआ चीजें सही दामों में (above cultivation cost & profit) खरीदेगा तो किसी को हिम्मत नहीं होगा डोलर की मूल्य बढजायेगा या रुपये की मूल्य गिर जायेगा करके खाने पीने की चीजों का दाम गिराने का। क्यों कि किसानों की गिन्दी भारत में सबसे ज्यादा हैं।
भारतीय किसानों के पैदा किया हुआ चीजें कम दामों में निर्यात करके उसी चीजें ऊँचे दामों में भसल उगालते वक्त पर आयात करना अपने खजाना लूटने की बराबर नहीं हैं क्या ? WTO किसानों के खिलाफ हैं।
क्या आपको पता हैं ? हिन्दुस्थान में हर बच्चा जनम लेता हैं भारी विदेशि कर्ज के साथ। सिर्फ केरल की विदेशि कर्ज 57,000 क्रोर हैं। यहाँ जो revenue income सरकार को मिलते हैं उसमें से 92% सरकारी कर्मचारियों का धनका और पेनषन (pension) केलिए और बाकि विदेशि कर्ज के interest देनें में लग जाता हैं। इस हालात में देश की विकास कैसे होगा ? World Bank, IMF, ADB आदी हमें विकास के नाम लूटेगा। हर State का यही हाल हैं।
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March 9, 2007 by चन्द्रशेखरन नायर
याहू के बारे में ताजा खबर मिलेगा तो इसी पन्ने पर जुडेगा।
याहू ने साहित्यिक चोरि की
र्घरेली औरत सूर्यगायत्रि की ब्लोग पोस्ट का चोरी कर्के वेबदुनियां ने याहू की पेज में छापी थी उस केलिये याहू ने अप्ने समाचार पन्नेपर माफी माँगी। अगर ऐसी गलतियों पर उस बात के खिलाफ हम इक्कटा हो जाये तो यहू जैसे ताक्कतवाला भी सर झुका देते हैं।
यह एक अच्छी शुरुवात हैं।
Few more links as follows.
One
Two
Three (यह इन्जिपेण्णु नाम की मलयालम ब्लोगर अंग्रेजि में हमारे नेत्रत्व कर् रही हैं।)
Four (यह उत्तश् भारत की अंग्रेजी ब्लोग से वेबदुनिया ने चुराय हुआ चित्र का सपूत हैं।)
Five (ग्लोबल वोइस के पन्ने पर भी ताजा खबर)
मध्यान्हचर्चा दिनांक : 09-03-2007
याहू का ठीकरा और के सर
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March 5, 2007 by चन्द्रशेखरन नायर

Picture Courtesy: Haree
Yahoo! India plagiarised contents from couple of blogs when Yahoo! launched their Malayalam and Hindi portal. The giant corporation hasn’t yet owned up to their responsibility nor did they apologize to the bloggers. When accused, they silently removed the contents. This is not acceptable. We need an apology! When asked for apology, Yahoo! India is now accusing WebDunia as their content provider. The contents appeared on Yahoo! domain and not on Webdunia’s Domain. Hence, we hold Yahoo responsible. I am protesting against this and joining hundreds of bloggers in this march against blatant corporate plagiarisation.
“याहू इन्डिया ने जब मलयालम एवं हिन्दी का पोर्टल लान्च किया तो ढेरों ब्लाग्स एवं वेबसाईट से सामग्री चोरी कर ली. इस भारी भरकम कम्पनी ने अब तक कोई ब्लागर समुदाय से न कोई जिम्मेदारी ली है न कोई क्षमा या खेद प्रगट किया है. जब याहू पर उंगली उठी तो उसने चुपचाप उस रचना हो हटा दिया. क्या यह स्वीकार किया जा सकता है?हम याहू से खेद प्रगट चाहते हैं. जब खेद प्रगट करने की मांग की गयी तो याहू ने बोला वेबदुनियां पर जिम्मेदारी डाल दी. यह सामग्री याहू की जालस्थल पर प्रकाशित हुई है न कि वेबदुनिया पर, इसलिये याहू को जिम्मेदार ठहराना एकदम उचित है. मैं अपने सैंकड़ों ब्लागर भाईयों के साथ आज मार्च ०५ २००७ को इस कम्पनी के बेधड़क चोरी के खिलाफ आवाज उठा रहा हूं”
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याहू का विरोध मत करो चन्द्रशेखरन!
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Ginger and mango latest in English
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नये हस्ताक्षर - 1
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होली का शहरी रंग
Key words: Yahoo!, plagiarism, WebDunia, copyright violation, content theft, Hindi, India, Protest
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March 5, 2007 by चन्द्रशेखरन नायर

आज हम कुच्छ साथियों ने याहू इन्टया की हमारे साथियों के ब्लोगों से लेख चुराने के खिलाफ अपने अपने पोस्टों में एक चित्र के साथ अमग्रेजि में और उसी के अप्ने भाशा में भी ट्रानसुलेट (transulate) करके आज पब्लिष (publish) करूँगा|
ह्में आप से यह निवेदन हैं की आप भी इसी दिन (5-3-07) एक पोस्ट का समरपण करें।
एक साथ हम मिल जाये तब उस ताक्कत याहू इन्टया को भारी पडेगा।
कैसे पोस्ट का समरपण करना आपलोग निरणय लें।
Ref. Wikipedia (In English)
Key words: Yahoo!, plagiarism, WebDunia, copyright violation, content theft, Hindi, India, Protest
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March 2, 2007 by चन्द्रशेखरन नायर
सूर्यगायत्रि नाम की एक ब्लोगर की साहित्यिक की चोरी कर्ने के बाद बोल्ते हैं कि यह चोरि वेब दुनियांवालों ने की। जब सूर्यगायत्रि की पोस्ट याहू मलयालम पन्ने पर आया तब वेब्डुनिया का नाम निशान भी उस पन्ने पर नहीं था।

अब सारे के सारे जिम्मेवारि वेबदुनियां वालों के उपर डाल्कर याहू जो हैं अप्ने हाथ साफ कर रहे हैं। क्या यह् न्याय हैं?

यह् चित्र Puzha.com सैट से साहित्यिक चोरि किया हुआ हैं। याहू ऐसे गलतियाँ कर्ते रहें और हम चुप रहें। नहीं कभी नहीं हम सबको बतायेग याहू ने रचना चुराया हैं और उनके खिलाफ नारे लगाओ कि याहू चोर हैं।
इसी महीने की 5 (5-03-2007)तरिख को यहू के खिलाफ आवाज उठायेंगे अपने ब्लोगों में। आप लोग भी अपने अपने स्रुष्टियों के ऊपर जरा ध्यान दें।
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February 27, 2007 by चन्द्रशेखरन नायर

Indian Rubber Board, Kottayam, Kerala
रबर के हिसाब रबरबोर्ड (Rubber Board) का ही प्रकाशिट करने वाला वेब सैट और हर महीने की ‘रबर स्टाटिस्टिकल न्यूस’ भी मौजूद हैं। वह नीचे दिया हुआ पन्ने ‘मैक्रोसोफट एक्सल वर्क्कषीट पेजों’ (Microsoft excel worksheet pages) में देख सकते हैं। लभ्यता के अनुसार समय समय पर हिसाब जोडता हैं।
1. 1990 से लेकर अब तक का हिसाब
2. 2006 - 2007 के रबर की हर दिन के मूल्य, हर महीने की निर्यात, आयात आदी
3. 1996-97 से लेकर अबतक सबकुच्छ
4. भारत से विदेशोम में रबर निर्यात (export) करने से घाटा भारि रकम
5. बदले में विदेश से जो आयात (Import) करने का दाम भी कम कैसे हैं?
6. आपूर्ति और ज़रूरत 2006-07 (Supply and Demand)
ऐसे जो हिसाब हमारे सामआयात करनाने आता हैं उससे स्पष्ट जाहिर होत हैं कि सब से ज्यादा नुकसान किसानों और जो रबर से च्छोटे च्छोटे वस्तु बनाते हैं (Small scale Industries)। सारे के सारे एक्सपोर्ट केरल से होता हैं। इसकेलिये मदत सर्कार की तरफ से और रबर बोर्ड की तरफ् से होता हैं। दक्षिण भारत में क्या हो रहा हैं उत्तर भारत वासियों को पत नहीं और् उलटा फी हो रहा हैं। उदाहरण के तौर पर पंजाब में गेहु को किसानों का मिल्नेवाला दाम और केरळ में इसीका खरीदने का दाम में अंतर बहूत हैं। वैसे ही रबर भी दामों में अंतर बहूत हैं। केन्द्र सरकार की तरफ से निर्यात कर्नेवालों को बहूत सहायता भी मिल्ते हैं। रबर बोर्ड जो हमें इन सबका हिसाब देता हैं वैसे और किसी भी चीज के बारे में हमको प्राप्त नहीं।
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February 27, 2007 by चन्द्रशेखरन नायर
भारतीय
स्वाभाविक रबर की उत्पादन दुनियां में चौथा स्थान पर हैं। उसमें 92 प्रतिशत केरल में से हैं। रबर एक ऐसे पेड हैं जिसका ‘सैलम’ याने की तना (Stem) की सफेद हिस्सा बहूत ज्यादा हैं। उसी वजह से गर्मी शुरु होने से पहले इस पेड के सारे के सारे पत्ते सूखकर गिर जाते हैं और गर्मियों के समय हरे पत्तों से भराहुआ छायेदार रह्ता हैं। तना के ऊपर्वाले हिस्सा छाल(bark) एक अलग किसम का चाकू से झील्कर लाटेक्स कपों के सहायता से इकट्टा कर्ते हैं। लाटेक्स और जो रबर षीट से ‘हान्ड ग्लौस’ (hand gloves) टयर (Tyre) वगैरा और कई किसम के चीजें बनते हैं। यह अलग अलग इस्तेपाल केलिये काम आते हैं।
भारत में ‘मिनिस्ट्रि ओफ इन्डुस्ट्रि आन्ड कोमेर्स’ (Ministry of Industry and Commerce) के नीचे किसानों, व्यापारियों और व्यवसायियों को मदद कर्ने केलिये एक रबर बोर्ड केरल में कोट्टयम जिने में हैं। उत्पादन, भण्डार, उपभोग करना, निर्यात करना (export) और इम्पोर्ट (import) आदी के हिसाब इस बोर्ड ‘वेब सैट’ (web site)और झाप्कर (printed) पब्लिष (publish) कर्ते हैं।
रबर की खेती के बारे में हमें जो रबर बोर्ड के वैग्यानिकों से प्राप्त हुआ उन में कयी गलतियॉ भी हैं। उडाहरण के तौर पर रबर की खेतोम में उतपादन कम होने का कारण ‘ब्रौण बास्ट’ (Brown bast)से ‘नेक्रोसिस’ (Necrocis) होजाता हैं। आज तक इस्का कारण और इलाज दुनियॉ में किसी भी वैग्यानिक स्पष्ट नहीम किया। परन्तू इसी बीमारि का कारण और इलाज मैं बताने से भी चुप रह जाते हैं। इस बीमारि का कारण कोश के मरजाना हैं। इन कोशों को जिन्दा रखने केलिये मग्नीष्यम सलफेट (magnesium Sulphate) की देना जरूरि हैं। लेकिन किसी को यह नहीं पता है यूरिया, अमोणियम सल्फेट और फाक्टम फोस के साथ मग्नीष्यम डदेने से उल्टा असर् होता हैं। क्योम् कि रासायनिक (Chemical) खादोम् में ‘एन’ (N) जो हैं वह् अम्लस्वभाव (Acidic soil) का होता हैं और मग्नीष्यम जो हैम् क्षारस्वभाव (Alkaline Soil) की जमीन में ही ठीक से काम करेग। रासायनिक एन जो हैं मट्टी कि ‘पीएच्च’ (pH) नीचे लायगा।
‘अपूर्ण’
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February 25, 2007 by चन्द्रशेखरन नायर
मैं ने हिन्दी में प्रथम पोस्ट या लेख प्रकाशित किया है।
भारत वासियों केलिये केरल से एक मामूली किसान कुच्छ बातों के विशकलन कर रहा हूँ। भारत की आबादी बड रहा हैं। लेकिन खाने पीने की चीजों की कमी शुरु होगया। साथ ही गुण भी गायब हो रहा हैं। क्यों कि जमीन कि जैव संपत्ति खतम हो रहा हैं। साफ मतलब यह हैं कि जमीन मर रहा हैं। जिंदा जमीन कि ऊपरी हिस्से में earth worms की कमी जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद और कीडे मकोडे केलिये जो जहर झिडकते हैं उसी वजह से हो रहा हैं। जो मनुष्य को हजम नहीं होगा वे पानि, मिट्टी, हवा और सौरोर्ज को भी हजम न्हीं होगा। यहाँ क्रृषि उद्योग जहरों के प्रचारक बनकर सर्वनाश की ओर हमें पहुँचाने में कठिन प्रयत्न कर रहे हैं।
जो जहर मनुष्य के मृत्यु के कारण हो सक्ता हैं, उसी जहर को थोडी मात्रा में पौधों को देने से वही जहर मनुष्य को धीरे धीरे मृत्यु की ओर ले जाता हैं। परंतु पौधे जहर की असर थीरे थीरे प्रकट कर्ता हैं। जहर की प्रयोग पैदावार जरूर बढायेगा लेकिन उसका प्रभाव आनेवाली पीडी पर जरूर होगा। वह पीडी अपाहिज, मंदबुद्धी, कर्क जोजी आदि के शिकार होने की संभावना शत प्रतिशत हैं।
जो जहर पेड पौधे या जमीन पर झिडकते हैं उसमें ज्यादा हिस्सा समुन्दर में पहूँचता हैं। बाकि कुच्छ पेड पौधे के अंदर और भूजल में मिल जायेगा। जो deepwell से mineral water मिलता था वह आज कल कीडे मकोडे खतम करने केलिये इसतेमाल कर सकते हैं। जो जहर समुन्दर में जैव संपत्ति के साथ पहूँचते हैं वह मछली को खाने का कीडों की पैदा होने नहीं देगा।
केरल में कासर्गोट (Kasargodu) जिले में काजू की पेडों में जो ‘एन्टोसलफान’ (Endosulfan) झिडक्ने पर इर्द गिर्द के इलाके में जो कुच्छ भुगत रहा हैं वह हम देख रहा हैं। केला कि पौदों में इस्तेमाल करनेवाला ‘कार्बोफुरान’ (Carbofuran) एन्टोसलफान से ज्याद जहरीला हैं। पिछले साल केरल में चूहों को मारने केलिये मुफ्त में ‘रोडोफे’ (Rodofe) नाम कि ‘ब्रोमोडियोलोण’ (Bromadiolone) दिया था वह इन सब से जहरीला था।
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