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Archive for the ‘केरल’ Category

मैं ने रबड् बोर्ड से 2006-07 की निर्यात के बारे में जानकारि हासिल करने की कोशिश की। परंतू मुझे बेवकूफ बना दिया। मैं उन से निर्यात के दिन, निर्यात करने वाले का नाम, निर्यात कीगये वजन, रबड् की किसम (आरऎसऎस षीट, लाटेक्स, ऐऎसऎनआर आदि), किस देश को भेजा, निर्यात की मूल्य आगी माँगा था। पहले [...]

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केरल की मंत्रालय, खादिबोऱ्ड, विद्युत बोऱ्ड (Kerala State Electricity Board), मट्रिक तक की तमाँ विद्यालयों आदि ग्नू-लिनक्स , उबुण्टु या फेरोडा ओपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल कर रहे हैं। जब से स्वतंत्र सोफ्टवेयर इसतेमाल करना शुरू की तब से कभी भी सिस्टम ऱीफोरमाट करने का जरूरत नहीं हुआ। विद्यालयों में ऐटी@स्कूल नाम की डेबियान बेसड् ग्नू-लिनक्स डिस्ट्रिबूषन [...]

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कुच्छ बुडों के ब्लोगिंग के बारे में सोलह दिसंबर (इतवार) की टैंस ओफ इन्ड्या में छापे नामों में मेरा नाम भी शामिल हैं। श्रीमति. मीनाक्षि कुमार् ने कुच्छ लब्जों में मेरे बारे में जो कुच्छ लिखी गई हैं वह केरल की एक मामूली किसान को बहूत ही महत्वपूर्ण हैं। लेखिका ने ऐसे अंग्रेजी [...]

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किसानों आप लोग सोरहा हैं क्या ?   अब समय आगया जागने का। जो खाने पीने की दाम बढजायेगा तो रुपये का मूल्य कम होजायेगा । उस वजह से सबजी, चावल, गेहू आदी चीजों की दाम बढने से रोकने की केशिश चारों तरफ से हो रहा हैं। sharemarket की इन्डेक्स बढें, जाली रुपया फैलें(जो नहीं होना चाहिए), सरकारी [...]

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याहू के बारे में ताजा खबर मिलेगा तो इसी पन्ने पर जुडेगा।
याहू ने साहित्यिक चोरि की
र्घरेली औरत सूर्यगायत्रि की ब्लोग पोस्ट का चोरी कर्के वेबदुनियां ने याहू की पेज में छापी थी उस केलिये याहू ने अप्ने समाचार पन्नेपर माफी माँगी। अगर ऐसी गलतियों पर उस बात के खिलाफ हम इक्कटा हो जाये तो यहू [...]

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भारतीय स्वाभाविक रबर की उत्पादन दुनियां में चौथा स्थान पर हैं। उसमें 92 प्रतिशत केरल में से हैं। रबर एक ऐसे पेड हैं जिसका ‘सैलम’ याने की तना (Stem) की सफेद हिस्सा बहूत ज्यादा हैं। उसी वजह से गर्मी शुरु होने से पहले इस पेड के सारे के सारे पत्ते सूखकर गिर जाते हैं और [...]

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मैं ने हिन्दी में प्रथम पोस्ट या लेख प्रकाशित किया है। 
भारत वासियों केलिये केरल से एक मामूली किसान कुच्छ बातों के विशकलन कर रहा हूँ। भारत की आबादी बड रहा हैं। लेकिन खाने पीने की चीजों की कमी शुरु होगया। साथ ही गुण भी गायब हो रहा हैं। क्यों कि जमीन कि जैव संपत्ति खतम [...]

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