मैं चन्द्रशेखरन नायर केरल में तिरुवनन्तपुरम जिने का रहनेवाला 58 साल (उम्र) के पूर्व सैनिक हूँ। मैं एस.एस.एल.सि तक पढा लिखा हूँ। हिन्दी में अच्छी तरह लिख नहीं सकता तो भी मेरा कोशिश जारि रहेगा।
चन्द्रशेखर जी…आपका स्वागत है…यह एक सुखद आश्चर्य है कि हिन्दी बेल्ट से इतना दूर बैठा कोई हिन्दी प्रेमी अपनी आकांक्षाएं, अभिव्यक्तियाँ , अपेक्षाएं और वेदनाएं हिन्दी में लिख रहा है/ इस कोशिश का हार्दिक स्वागत है
आपको मेरा नमस्कार.
भूमंडलीकरण के प्रभावों पर कुछ लिखिये. केरल में खेती-किसानी पर क्या असर हो रहा है थोड़ा उसके बारे में बताईये. मैं आपके ब्लाग का लिंक अपनी साईट पर दे रहा हूं.
चंद्रशेखरण जी
पहली तो बात यह कि आपकी हिंदी बहुत अच्छी है. दूसरी यह कि यह जान कर बहुत अच्छा लगा कि कोई है ब्लोग की दुनिया में भी जो किसानों की मुश्किलें उठा सकता है. सच कहूं तो मुझे आपसे प्रेरणा मिली. आप नियमित रुप से और लगातार लिखिए. ताकि व्यवस्था के हाशिए पर चले गए किसानों की समस्याएँ दुनिया के सामने आ सकें.
गुलदस्ता और फूलघर से जितनी दूरी तन की , उतना समीप रहा मेरा मन ,धूप ~ छाँव का खेल जिंदगी , क्या वसंत , क्या सावन !! नेत्र मूँद कर कभी दिख जाते , वही मिटटी के घर ~ आँगन !वही पिता की पुण्य छवि ~ सजल
जैसी कि आशंका थी वही हुआ खीरी जनपद के नष्ट हो रहे जंगलों व आहार के चलते बाहर निकले जंगली जानवरों के साथ वही हुआ जिस का डर था इस तेंदुए पर दो दिनों तक सैकड़ों राउंड गोलियाँ चलायी गयी किंतु इस जानवर
हमारा साहित्य कई कालजयी रचनाओं से भरा पडा है. मानवता की करुण दास्तानें और उनकी निर्दोष अभिव्यक्तियों की बानगियाँ चप्पे-चप्पे पर दर्ज हैं. रेडियो रेड इन्हीं रचनाओं का महत्व और उत्सव रेखांकित करता रहता
शायदा दैनिक भास्कर के चंडीगढ़ संस्करण में न्यूज़ एडिटर हैं। बेटियों का ब्लॉग के लिए मीडिया अवॉर्ड लेने जब मैं चंडीगढ़ गया था, तो उनसे मुलाक़ात हुई। तब रजनीगंधा के साथ उनके रिश्ते और बात करने के
साहित्यकारों की दुर्दशा क्यों भाइयों...हिंदी के जमें जमाए साहित्यकार ब्लॉग की दुनिया में भी पटखनी खाए पड़े हैं...तो दूसरी ओर वे ब्लॉगर जम कर पढ़े और सराहे जा रहे हैं जो साहित्यकार नहीं रहे हैं...यहाँ
बड़े जोर की गर्मी थीतपती जगती लगती थीताल तलैया सब थे सूखेज्वार खड़ी ज्यों सबसे रूठेअम्बर तक धूल का उठे गुबारज्यूँ समुद्र में आ गया ज्वारबच्चे मचले जाते थेप्यास प्यास चिल्लाते थेमेघा मेघा पानी देगली गली
किशना खेत में हल जोत रहा था। जून की तपती दुपहरी में सूरज की लावा उगलती किरणें, बदहाल करती गर्मी की धरती पर बूंदे गिरती थीं। पसीना उसकी काया से छलक कर अतृप्त धरा को श्रम की बूंदों से तृप्त कर रहा था।
किसान अब कर्ज के बोझ से आत्महत्या नहीं करेंगे। अब वो खेती के लिए पैसा न मिलने से आत्महत्या करेंगे। ये सुनने बहुत कड़वा लग रहा है। लेकिन, कड़वी सच्चाई यही है। आज के अखबारों में ये खबर है जो, कल से ही
शायदाउर्दू की लिपि में उनकी कोई किताब नहींअरुण आदित्यकुछ रंग थे। थोड़ी ख़ुशबू थी। थोड़ी धूप थी, कुछ रूप था। इन सब को मिला कर एक आदमी बनता था। आदमी से थोड़ा ज़्यादा आदमी। दुनियादार से थोड़ा कम दुनियादार।
आज महक जी के ब्लाग पर एक फोटो और अच्छी गजल देखी। ऐसे में मेरा कवित्व मन जाग उठा। कुछ पंक्तियां मेरे हृदय में इस तरह आईं-
समंदर किनारे खड़े होकर
चंद्रमा को देखते हुए मत बहक जाना
अपने हृदय का
चाचा आप क्यों गुस्सा हो गए?आप तो मुझे रोज चूमा करते थेअब कटे-कटे से क्यों रहते हैं?आपने चुन्नू भैया को डांटा क्यों नहीं?उसने आपकी लाई मिठाई मुझे नहीं दी।मुन्नी दीदी भी अब मेरे साथ लूडो नहीं
पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा संकट हिंदू ही झेल रहे हैं। मानवाधिकार संबंधी एक नई रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश, पाकिस्तान, मलेशिया और सऊदी अरब सहित दुनियाभर के कई देशों में रहने वाले हिंदू रोजाना
पहली किश्त और दूसरी किश्त क्रमश:जो बात पूंजीवादी उत्पादन व्यवस्था को सभी पूर्ववर्ती उत्पादन व्यवस्थाओं से अलग करती है, वह है उत्पादन का आवश्यकताओं से निर्भरता से मुक्त हो जाना। सभी पूर्ववर्ती
भोपालआज सवेरे जगा ही था कि अखबार वाला पेपर देकर चला गया, एक नजर डालकर सिराहने साइडमें रख कर सो गया फ़िर झपकी लगी ही थी कि एक ख़याल आया और में जग गया उसी पेपर को उठाया और तल्लीनता से पढने लगा आख़िर उस
दिल्ली में ही नही बल्कि बाहर भी जीबी रोड मशहूर है ॥कहा जाता है रेड लाइट एरिया है । एक बार गया था उस रोड से ॥रिक्शे पर सवार होकर जब मैँ रोड क्रास कर रहा था तो मैं नजर बचाकर उन कोठों की ओर तांकने का
एक बात बार बार आपसे पूछने का मन करता है कि आपके जेब में आजकल पैसे रहते हैं कि नहीं ? मैं अपनी बात कहूँ तो शर्माते हुए कहना पडेगा कि 20 तारीख से मैं एक 50 को नोट बचा कर रखा हूँ कि अगर कहीं इमरजेन्सी
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चन्द्रेटन्… आप्को शुभ्कामनायॆ। हिन्दी मै भी आप अप्ना कर्म कुशलता दिखाइए।
Very inspiring - best wishes all the way from the UAE.
farrukh
ചന്ദ്രഹ്സെഖര ജീ,
കാഫീ അച്ഛീ ഹിന്ദീ ഹൈ ആപകീ |
മൈ ഭീ ദൊ സാല കെരല (പാലക്കഡ്)രഹാ ഹൊ സൊ കൊര്ച്ചു മള്യാള്മ അരിയൊ
നമസ്കാരം
नायर जी… बहुत अच्चा … आपका कोशिश जरूर काम्याब होगा ।
मेरा शुभकामनाये आप का साथ हे ।
ये बहुत अछा हो गया / आप्को मेरा शुभ्कामनावोॅ के सात मेरा प्रणाम /
आपका बहुत बहुत स्वागत है कृपया लिखते रहें
आपका स्वागत है. भूलो को भूल कर कोशिश करते रहें. हम है ना पढ़ने के लिए.
हमारी शुभकामनाएं.
प्रिय भाई चंद्रशेखरन नायर !
हिंदी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है. आपका आना हमारे लिये विशेष महत्व रखता है . गलतियों की चिंता न करें .
aapko meri shubhkamnayein
लिखते रहें । हम पढते रहेंगे ।
चन्द्रशेखर जी…आपका स्वागत है…यह एक सुखद आश्चर्य है कि हिन्दी बेल्ट से इतना दूर बैठा कोई हिन्दी प्रेमी अपनी आकांक्षाएं, अभिव्यक्तियाँ , अपेक्षाएं और वेदनाएं हिन्दी में लिख रहा है/ इस कोशिश का हार्दिक स्वागत है
आपकी कोशिश बहुत सराहनीय है. लिखते रहिये.
मैं कोच्चि में हूं एवं आपकी मदद के लिये उपलब्ध हू.
– शास्त्री जे सी फिलिप
आपको मेरा नमस्कार.
भूमंडलीकरण के प्रभावों पर कुछ लिखिये. केरल में खेती-किसानी पर क्या असर हो रहा है थोड़ा उसके बारे में बताईये. मैं आपके ब्लाग का लिंक अपनी साईट पर दे रहा हूं.
चंद्रशेखरण जी
पहली तो बात यह कि आपकी हिंदी बहुत अच्छी है. दूसरी यह कि यह जान कर बहुत अच्छा लगा कि कोई है ब्लोग की दुनिया में भी जो किसानों की मुश्किलें उठा सकता है. सच कहूं तो मुझे आपसे प्रेरणा मिली. आप नियमित रुप से और लगातार लिखिए. ताकि व्यवस्था के हाशिए पर चले गए किसानों की समस्याएँ दुनिया के सामने आ सकें.
आज इध्रर से आया । मैं भी हिन्दी लिखने का प्रयास करूंगा ।