सारे दुनियाँ में सम्पत्ती की लभ्यता पर भारत १२ स्थान पर पहूँचा हैं। उसकेलिये किसानों को कर्जेदार और गरीब रखना पडरहा हैं। रुपये की दाम उँचा रखनेकेलिये खाने पीने की चीजों का दाम कम रखना जरूरी हैं। उसकेलिये खेतों में उगलनेवाले धान्य की दाम कम रखने पर बेरोजगारी सरपर लेली हैं। उसी उद्देश प्राप्त करनेकेलिये तेल, गेहू आदि चीजों के आयात कर रहे हैं। बान्कों (Banks) की मुनाफा बडाने केलिये जमीन की documents जमा करके कर्ज या उदार देकर हुद्खुशी (suicide) करने केलिये मजबूर कर रहे हैं। विदर्फा में ८ घंटे में एक हुद्खुशी प्रधानमंत्री के पाकेज से पहले होता था अब ४ घंटे में एक हो गया। किसानों को मुनाफा होना कयी सालों से मना हैं।
किसानों को सपना देखने केलिये क्या क्या वादायें, तरीके, सुविधायें, बजट में भारि रकम वगैरा दिखाकर इस देश को सम्पन्न करने में केन्द्र सर्कार की तरफ से बहूत कुच्छ कर रहे हैं। घाटे में खेती कितने किसानों को कर सकेगा? अगर खेती की हाल कुच्छ साल यही होगा तो हमें खाने पीनेकेलिये सब्कुच्छ आयात करना पडेगा। किसान उत्पादक (producer) और consumer भी है। ऐसे हालात में सब्जी, चावल, गेहू आदि चीजों की सही दाम की लभ्यता चाह्ते हैं तो खाने पीने की चीजों की आयात बंद करना ही अच्छा होगा। किसानों के नाम पर आँसू बहाने से कोई भी कठिनाई हल नहीं होगा। नारियल की तेल, पाँऒइल, सोयाबीन तेल वगैरह आयात करके सरसों, नारियल, मुम्फल्ली, सूरज मुखी आदि खेतियों के विनाश होरहा हैं। Agri business किसानों को लूट्नेकेलिये हैं।
जमीन की बर्बादी soil testing laboratories कर रहा है। एन.पि.के के जाँच और इस्तेमाल acidic soil बनाकर पौदों, पशु पक्षियों और इन्सान को बीमारियाँ प्रदान कर रहे हैं। रासायनिक एन (नैट्रग्न) जमीन की इसतेमाल pH कम होने और पेड पौधों को भूखा मारते हैं। secondary neutrients & trace elements के काम इन्को मालूम नहीं है क्या? जहरें झिडक कर जमीनि कीडाओं (earth worms) को मार दी और पीने की पानि भी बर्बाद करदी। दिन पर दिन कई किसम के बीमारियाँ फैल रहे है और इलाज मेहगा भी पडरहा हैं।








