भारतीय स्वाभाविक रबर
February 27, 2007 by चन्द्रशेखरन नायर
भारतीय स्वाभाविक रबर की उत्पादन दुनियां में चौथा स्थान पर हैं। उसमें 92 प्रतिशत केरल में से हैं। रबर एक ऐसे पेड हैं जिसका ‘सैलम’ याने की तना (Stem) की सफेद हिस्सा बहूत ज्यादा हैं। उसी वजह से गर्मी शुरु होने से पहले इस पेड के सारे के सारे पत्ते सूखकर गिर जाते हैं और गर्मियों के समय हरे पत्तों से भराहुआ छायेदार रह्ता हैं। तना के ऊपर्वाले हिस्सा छाल(bark) एक अलग किसम का चाकू से झील्कर लाटेक्स कपों के सहायता से इकट्टा कर्ते हैं। लाटेक्स और जो रबर षीट से ‘हान्ड ग्लौस’ (hand gloves) टयर (Tyre) वगैरा और कई किसम के चीजें बनते हैं। यह अलग अलग इस्तेपाल केलिये काम आते हैं।
भारत में ‘मिनिस्ट्रि ओफ इन्डुस्ट्रि आन्ड कोमेर्स’ (Ministry of Industry and Commerce) के नीचे किसानों, व्यापारियों और व्यवसायियों को मदद कर्ने केलिये एक रबर बोर्ड केरल में कोट्टयम जिने में हैं। उत्पादन, भण्डार, उपभोग करना, निर्यात करना (export) और इम्पोर्ट (import) आदी के हिसाब इस बोर्ड ‘वेब सैट’ (web site)और झाप्कर (printed) पब्लिष (publish) कर्ते हैं।
रबर की खेती के बारे में हमें जो रबर बोर्ड के वैग्यानिकों से प्राप्त हुआ उन में कयी गलतियॉ भी हैं। उडाहरण के तौर पर रबर की खेतोम में उतपादन कम होने का कारण ‘ब्रौण बास्ट’ (Brown bast)से ‘नेक्रोसिस’ (Necrocis) होजाता हैं। आज तक इस्का कारण और इलाज दुनियॉ में किसी भी वैग्यानिक स्पष्ट नहीम किया। परन्तू इसी बीमारि का कारण और इलाज मैं बताने से भी चुप रह जाते हैं। इस बीमारि का कारण कोश के मरजाना हैं। इन कोशों को जिन्दा रखने केलिये मग्नीष्यम सलफेट (magnesium Sulphate) की देना जरूरि हैं। लेकिन किसी को यह नहीं पता है यूरिया, अमोणियम सल्फेट और फाक्टम फोस के साथ मग्नीष्यम डदेने से उल्टा असर् होता हैं। क्योम् कि रासायनिक (Chemical) खादोम् में ‘एन’ (N) जो हैं वह् अम्लस्वभाव (Acidic soil) का होता हैं और मग्नीष्यम जो हैम् क्षारस्वभाव (Alkaline Soil) की जमीन में ही ठीक से काम करेग। रासायनिक एन जो हैं मट्टी कि ‘पीएच्च’ (pH) नीचे लायगा।
‘अपूर्ण’






