मैं ने हिन्दी में प्रथम पोस्ट या लेख प्रकाशित किया है।
भारत वासियों केलिये केरल से एक मामूली किसान कुच्छ बातों के विशकलन कर रहा हूँ। भारत की आबादी बड रहा हैं। लेकिन खाने पीने की चीजों की कमी शुरु होगया। साथ ही गुण भी गायब हो रहा हैं। क्यों कि जमीन कि जैव संपत्ति खतम हो रहा हैं। साफ मतलब यह हैं कि जमीन मर रहा हैं। जिंदा जमीन कि ऊपरी हिस्से में earth worms की कमी जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद और कीडे मकोडे केलिये जो जहर झिडकते हैं उसी वजह से हो रहा हैं। जो मनुष्य को हजम नहीं होगा वे पानि, मिट्टी, हवा और सौरोर्ज को भी हजम न्हीं होगा। यहाँ क्रृषि उद्योग जहरों के प्रचारक बनकर सर्वनाश की ओर हमें पहुँचाने में कठिन प्रयत्न कर रहे हैं।
जो जहर मनुष्य के मृत्यु के कारण हो सक्ता हैं, उसी जहर को थोडी मात्रा में पौधों को देने से वही जहर मनुष्य को धीरे धीरे मृत्यु की ओर ले जाता हैं। परंतु पौधे जहर की असर थीरे थीरे प्रकट कर्ता हैं। जहर की प्रयोग पैदावार जरूर बढायेगा लेकिन उसका प्रभाव आनेवाली पीडी पर जरूर होगा। वह पीडी अपाहिज, मंदबुद्धी, कर्क जोजी आदि के शिकार होने की संभावना शत प्रतिशत हैं।
जो जहर पेड पौधे या जमीन पर झिडकते हैं उसमें ज्यादा हिस्सा समुन्दर में पहूँचता हैं। बाकि कुच्छ पेड पौधे के अंदर और भूजल में मिल जायेगा। जो deepwell से mineral water मिलता था वह आज कल कीडे मकोडे खतम करने केलिये इसतेमाल कर सकते हैं। जो जहर समुन्दर में जैव संपत्ति के साथ पहूँचते हैं वह मछली को खाने का कीडों की पैदा होने नहीं देगा।
केरल में कासर्गोट (Kasargodu) जिले में काजू की पेडों में जो ‘एन्टोसलफान’ (Endosulfan) झिडक्ने पर इर्द गिर्द के इलाके में जो कुच्छ भुगत रहा हैं वह हम देख रहा हैं। केला कि पौदों में इस्तेमाल करनेवाला ‘कार्बोफुरान’ (Carbofuran) एन्टोसलफान से ज्याद जहरीला हैं। पिछले साल केरल में चूहों को मारने केलिये मुफ्त में ‘रोडोफे’ (Rodofe) नाम कि ‘ब्रोमोडियोलोण’ (Bromadiolone) दिया था वह इन सब से जहरीला था।









जय जवान जय किसान|
അറിയാത്ത ഭാഷ പ്രയോഗിക്കുമ്പൊ ആരോടെങ്കിലും ചോദിച്ച് മനസ്സിലാക്കീട്ട് പ്രയോഗിക്ക് ചേട്ടാ. പുള്ളാരു കളിയാക്കും.
कोल्लाम्, चन्ड्रेट्टा. अटिपोलि आयिट्टुन्ट्.
जै हिन्ड्. जै किसान्. जै लल् बहाडूर् शास्त्रि.
जै चन्ड्र शेखरन् नायर् जी…
हम् को एल्लाम् मनस्सिलायी हे. इसलिये दन्यवाद्.
कोल्लाम्, चन्ड्रेट्टा. अटिपोलि आयिट्टुन्ट्.
जै हिन्ड्. जै किसान्. जै लल् बहाडूर् शास्त्रि.
जै चन्ड्र शेखरन् नायर् जी…
हम् को एल्लाम् मनस्सिलायी हे. इसलिये दन्यवाद्.
ചന്ദ്രേട്ടാ, ഉണ്ടിരുന്ന നായര്ക്കൊരു വിളി പോലെ ഇപ്പം ഹിന്ദീല് കിസ്സാന് വിളിക്കാന് എന്തു തോന്നി?
ikkaas@പിക്കാസ്
ആപ് നെ മുച്ഛേ മേരാ ഏക് ബഡാ ഗലതീ കോ ദിഖാക്കാര് ജോ മദത് കീ ഉസ്കേലിയേ ശുകൃഗുജാര് ഹൂം. മേരാ മട്രിക് ക്വാളിഫിക്കേഷന് കഹാം ആപ് കെ എംഎഡ് (ഫസ്റ്റ് റാങ്ക് കഹാം). കോയി ബാത് നഹീം ആപ് ആനേ വാല മേരാ പോസ്റ്റോം മേംഭീ ഐസേ കോയി ഗലതി ഹോഗ തോ ജരൂര് ബതാനാ. ആജ് കല് കേ ബച്ചെ മേര പോസ്റ്റ് കോ ദേഖ്കര് കോയി മജാക് ഉഠായെഗാ തോ ഫീ മുച്ഛേ കോയി ശരം നഹീം. മേരാ ഗലതി മാന്കര് മൈം ഠീക് കര്നേ കാ പ്രയാസ് കരൂംഗാ.
ആപ് കാ ഗലതി മാന്കര് ആപ് ഠീക് കര്നേ കാ പ്രയാസ് കരേഗാ…
യെ വാചക് സബ് കാ കണ്ണുതുറപ്പിക്കന് ഹേ ! (ഹോ?) ഹൈ?
जै हिन्ड्. जै किसान्. जै लल् बहाडूर् शास्त्रि.
जै चन्ड्र शेखरन् नायर् जी…
हम् को एल्लाम् मनस्सिलायी हे. इसलिये दन्यवाद्.
(അങ്ങ് തീര്ച്ചയായും വലിയ മാതൃക തന്നെയാണ്)
പ്രിയപ്പെട്ട ചന്ദ്രേട്ടന്,
നിങ്ങളുടെ ഹിന്ദി മോശമാണെന്ന് മുഖത്ത് നോക്കി വിളിച്ച് പറയുകയാണ് ഞാന് ചെയ്തത്. നിങ്ങളുടെ ബ്ലോഗില് കമന്റിടാന് എനിക്കു സ്വാതന്ത്ര്യമുള്ളിടത്തോളം കാലം, തെറ്റു കണ്ടാല്, അത് പറയണമെന്ന് തോന്നിയാല് ഞാനത് ചെയ്യുക തന്നെ ചെയ്യും.
പിന്നെ ചന്ദ്രേട്ടന്റെ പഴയ പത്താം ക്ലാസിന്റെയും പട്ടാളക്കാരനെന്ന നിലയിലുള്ള ലോകപരിചയത്തിന്റെയും ഏഴയലത്തുപോലും വരില്ല എന്റെ പ്രീ ഡിഗ്രിയും ഗുസ്തിയും.
(നിങ്ങള് ഓരോ പോസ്റ്റിടുമ്പോഴും ജീ ടാക്കിലൂടെ ലിങ്ക് തരാന് കാണിക്കുന്ന ശുഷ്കാന്തി എന്നെക്കുറിച്ചുള്ള വിവരങ്ങള് പബ്ലിക്കായി വിളിച്ചു പറയുന്നതിനു മുന്പ് എന്നെപ്പറ്റി തിരക്കുന്നതില് കാണിക്കാത്തതെന്ത്? എമ്മെഡ്ഡിനു ഫസ്റ്റ് റാങ്ക് പോലും, അതും എനിക്ക്!! ഹഹഹ പരിതാപകരം ചന്ദ്രേട്ടാ, പരിതാപകരം.)
आपकी पोस्ट फायरफौक्स में फैल रही है इसलिये पढ़ाई में नहीं आ रही है। इसे ठीक कर लें। यह अक्सर justify करके लिखने में होती है। कृपया right align करके लिखें।
हिन्दी चिट्ठाजगत् में आपका हार्दिक स्वागत् है.
स्वागतम् !
निवेदन है कि आप हिन्दी और मलयालम ब्लागरों के बीच में सेतु का काम भी करते रहिये । इससे दोनो को बहुत लाभ होगा। आशा है आप समय-समय पर मलयालम ब्लागजगत में चल रहे क्रियाकलापों से हिन्दी-ब्लागरों को अवगत कराते रहेंगे।
स्वागत् है.
आपका हिंदी चिट्ठाजगत में स्वागत है!
बस कूद जाइये मैदान में
भली करेंगे राम !!
हिन्दी ब्लॉगजगत में आपका हार्दिक स्वागत है। खुशी हुई कि कृषि से संबंधित विषय पर आपने पहला हिन्दी ब्लॉग आरंभ किया। उम्मीद है नियमित रुप से लेखन जारी रहेगा।
स्वागत है।
Bahut badhai
A wonderful and impressive blog. We obeserved that you have published the feed in this blog. But there is no indication of the terms of use.
Actually we want to put the feed in aggregated form in our network of websites, “www.chhattisgarhnews.info” is one of them. If interested, please guide us about the terms related to the feed published by you
kisaan behal
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धनराज वाधवानी,
भाईसाहब मुझे यह आपके कमेन्ट पढ नहीं सकते हैं।
किसान बेहल
आर्थिक सुधार देश के लोगो की आय बढ_आ रहे है और बढ_आ रहे है किसानो की लागत। खेती का पूरा मूल्य किसानो को नही मिलता है लेकिन अब इन्टेरनेट और एसएमएस आ जाने से कुच्ह शिख्शित किसान बाजार का समुचित और सुनिश्चित अध्ययन कर निर्बाध रूप से पूर्व निर्धारित अधिकतम पर अपनी फ़सल बेच सकते है। अभी टेक्नालॊजी का समूचा उपयोग हर किसान ले पाये इसमे अभी कुच्ह देरी है। विदेशो से उपज आयात होने से सप्लाई बढ_ जाती है और इससे मांग व पूर्ती के सिद्धान्त अनुसार पैदा वार का मूल्य किसानो को नही मिल पाता। किसान कमानी नहीएहोने से अपनी जमीन बहकावे मे आकर ओने पोने मे उद्योग पतियो व सरकारो को बेच रहे है। ऐसे मे खेती का भविष्य अन्धकार मय हो जाना स्वाभविक है। जन कल्याण व किसान का कल्याण का दावा करने वाली सरकारे किसानो को पानी बिजली बीज आदि उचित दाम पर पर्याप्त मात्रा मे नही दिलवा पाती है। फ़िर भाव नही मिलने से गन्ने जैसी फ़सले किसान जला देते है। कर्ज मे पैदा होकर कर्ज मे ही मरते है। अण तो सरकार दिला देती है लेकिन भारी भरकम ब्याज भरने के लिये किसान पैसा कहा से चुकाएगा।यह भी दुःखद हहि कि कई मामलो मे किसानो को आत्महत्या के सिवा और कोई रस्ता उन्हे नही सूझता है। धनराज वाधवानीkisaan