मैं ने रबड् बोर्ड से 2006-07 की निर्यात के बारे में जानकारि हासिल करने की कोशिश की। परंतू मुझे बेवकूफ बना दिया। मैं उन से निर्यात के दिन, निर्यात करने वाले का नाम, निर्यात कीगये वजन, रबड् की किसम (आरऎसऎस षीट, लाटेक्स, ऐऎसऎनआर आदि), किस देश को भेजा, निर्यात की मूल्य आगी माँगा था। पहले उन्होंने जवाब दी कि सारे निर्यात के दिन उपलब्द नहीं, रजिस्टरों में लिपिबद्ध की हैं, और कई सौ पन्नों में एक साल के निर्यात चालू हैं।ङर आयात करने वालों से हर महीने की रिपोर्ट इकटा करते हैं, माँगा गया format में देने केलिये बहूत ज़्यादा भारी काम करना पडेगा, वह disproportionately divert the resources of the office, और माँग मान नहीं सकता। छः रुपये भेजने कि निरदेश पर तीन पन्ने हासेल हुआ।
माँगा गया सारे साराँश न मिलने का कारण Appellate authority को पहला अपील भेजने पर 4 March 2008 को एक हुक्म दी गई। वह यह था “he shall be satisfied if copies of those pages of data lying at various files and registers are made available to him as such so that he can compile them to arrive at the published figures; how many the number of those pages be”. साथ ही पब्लिक इनफरमेषन ओफीसर को 350 पन्ने पाने केलिये दो रुपया पन्ने की हिसाब से भेजने की निर्देश दिया। एप्रिल चार तारिख को 360 पन्ने मिले जिसमें RTI Act की बदनाम की गई। ऐसे पन्ने दी एक ही पन्ने की दो copy, शून्य पन्ने, Covering letters के copy वगैरा जोडकर दिया गया हैं। आगस्ट 2006 को पाला मारक्कटिंग को-ओपरेटीव सॊसैटी ने 2.13 रु में 893000 किलो आरऎसऎस 4 निर्यात किया हैं करके दिखा रहे हैंं जब की यहाँ के दाम 91.82 रु थे। इतने कम दामों में निर्यात कैसे हो सकते हैं?
श्री चित्तिर तिरुनाऴ् ऎन्जिनीरिंग कोलेज के छात्रों ने दिशा २००८ के भाग में फ्री सोफ्टवेयर इनस्टाळ फेस्ट मनाया। चालीस ओपरेटिंंग सिस्टम इनस्टाळ की गई आैर ३५० सीडि कि बटवारा भि हुआ। प्रमुख सिनेमा आक्टर सुरेषगोपि ने उनके लापटोप में फ्री सोफ्टवेयर इनस्टाळ की। सहायता केलिये भारतीय फ्री सोफ्टवेयर फौणटेषन, स्पेस, सिक्सवेयर, ऐलग तिरुवनन्तपुरम मौजूद थे।
राजा (सी इ ऒ, टेक्नोपाऱ्क), डो. वि.शशिकुमार (डयऱेक्टर फ्री सोफ्टवेयर फौण्टेषन) और मैं।
यही हैं सिनेमा आक्टर सुरेषगोपि
ऐसे और कार्यक्रम जारी रखने का भी निर्णय लिया। हमारे अगला कार्यक्रम क्रैस्ट नगर स्कूळ में फ्री सोफ्टवेयर इनस्टाळ फेस्ट होंगे। किसी भी व्यक्ती को वहाँ आकर ओपरेटिंग सिस्टम अपने अपने कंप्यूटर पर इनस्टाळ कर सकते हैं। अगले दिन में यह निर्णय लेनेकेलिये ङम इकटे हुये उनके चित्र नीचे देख सकते हैं।
और चित्रों केलिये क्लिक कीजिये।
कनकक्कुन्नु पालस में मनाया गया ग्नु/लिनेक्स इन्स्टाळ फेस्ट
केरल की मंत्रालय, खादिबोऱ्ड, विद्युत बोऱ्ड (Kerala State Electricity Board), मट्रिक तक की तमाँ विद्यालयों आदि ग्नू-लिनक्स , उबुण्टु या फेरोडा ओपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल कर रहे हैं। जब से स्वतंत्र सोफ्टवेयर इसतेमाल करना शुरू की तब से कभी भी सिस्टम ऱीफोरमाट करने का जरूरत नहीं हुआ। विद्यालयों में ऐटी@स्कूल नाम की डेबियान बेसड् ग्नू-लिनक्स डिस्ट्रिबूषन (debian based GNU-Linux distribution) इस्तेमाल कर रहा हैं। इस की निऱ्माण स्पेस नाम की एक चारिटबिल सोसैटि ने की हैं। स्वतंत्र सोफ्टबेयर की इस्तेमाल केलिये केरल ऐटी मिषन , अक्षयाआदी की सहयोग स्पेस को मिलरहा हैं।
इस के अलावा कई प्रोफषणल कोलेजों (Professional Colleges) में भी स्वतंत्र सोफ्टवेयर की इसतेमाल हो रहा हैं। इनमें MESCE एक ऎन्जिनीयऱिंग कोलेज भी शामिल हैं।
आँम जनता की सहायता केलिये एक स्वतंत्र मलयालम कंप्यूटिंग और चर्चा करनेकेलिये एक ग्रूप (smc-discuss Google Group) भी हैं। मलयालम यूणिकोड पोण्ट रचना और मीरा पढने केलिये इस्तेमाल करते हैं। लिखने केलिये स्वनलेखा या इलस्क्रिप्ट की इसतेमाल कर सकता हैं।
सन्तोष तोट्टिंगल ने जो ध्वनि जो बनायि हैं उसकी सहायता से जो देख नहीं सकता वैसे लोगों को लिखा गया हुआ बातें सुन सकेगा।
कुच्छ बुडों के ब्लोगिंग के बारे में सोलह दिसंबर (इतवार) की टैंस ओफ इन्ड्या में छापे नामों में मेरा नाम भी शामिल हैं। श्रीमति. मीनाक्षि कुमार् ने कुच्छ लब्जों में मेरे बारे में जो कुच्छ लिखी गई हैं वह केरल की एक मामूली किसान को बहूत ही महत्वपूर्ण हैं। लेखिका ने ऐसे अंग्रेजी में लिखी हैं। Interestingly, Chandrashekhar Nair, 58, has been blogging for close to four-five years. A former serviceman and a farmer, his blogs are on agriculture. “What I like most about blogging is that one can get a response within seconds of publishing a blog,” says the Thiruvananthapuram-based Nair, who blogs in English, Hindi and Malayalam.
आजतक किसी माध्यम ने ऐसे स्वाभाविक रबर की विश्लेषण प्राप्त नहीं किया हॊगा। ऐसे कुच्छ हिसाब यहाँ मौजूद हैं। 2006-07 वर्ष में स्वाभाविक रबर की पैदावार (production) 852,895 टणों (tonnes), उपभोग 820,305 टणों और पिझले महीने याने कि 31 मार्च 2006 में बचत 93,020 टणों थे। इससे यह मालूम होगा कि भारत रबर केलिये स्वतःपूर्ण है। बगैर ज़्रूरत के 89,699 ट्णों की आयात और 56,545 टणों की निर्यात किसलिये थी? सच यह है देशि और विदेशि बजारों में रबर की दाम गिराना ही लक्षય था। 2006-07 वर्ष की आँकडे और उसकी विश्लेषण नीचे दिया हुआ सारणी 1 में मौजूद हैं।
किसानों की बेचना = (पिछ्ले महीने की बचत + पैदावार) - महीने की आखिर में सम्भार = (22,125+ 84900)-53885 =827,050 लेकिन रबर बोर्ड के अनुसार 849,000 टणों की बदले में 852,895 प्रकाशित की गयी हैं।
निर्मातों की खरीदना = (उपभोग + महीने की बचत) - (शुरू की बचत या opening stock+ आयात) = (820,305+ 70,480) - (89,699+ 49,990 ) =751,096टणें हैं।
सारणी 1
महीने
पिझले महीने की बचत
पैदावार
किसानों की बेचना
निर्मातावों की खरीद
एप्रिल
22125
54555
59705
54597
मेय
16975
56500
59070
56106
जूण
14405
57610
61990
57738
जूलै
10025
65500
64125
53955
आगस्ट
11400
74495
74690
64432
सेप्टंबर
11205
73550
73870
68262
ओक्टोबर
10885
82970
77830
69516
नवंबर
16025
95525
73460
70103
डिसंबर
38090
101680
80755
67345
जनुवरि
59015
96450
93390
71384
फेब्रुवरि
62075
47560
55750
56482
मार्च
53885
42605
52415
61176
कुल मिलाकर
84900
827050
751096
सारणी 2 में आयात निर्यात की जानकारी है। सारणी 1 और सारणी 2 की विश्लेषण करने पर सबसे ज़्यादा पैदावार ओक्टोबर से लेकर जनुवरी तक है और उसी समय पर देशी बाजार में आर.एस.एस 4 की दाम अंतरदेशीय बाजार (Bangkok) की आर.एस.एस 3 से ऊपर दाम रहा हैं। साथ ही आयात बढा दी। इस से यह मालूम हो सकता है कि सौदागार (Dealer) और निर्माताओं की किसानों के खिलाफ क्री चाल है जो देशी और अंतरदेशीय दाम कई महीने तक गिराने की प्रयास था। लेकिन इस साल की शुरू में गर्मी और काम करनेवाले मजदूरों को कठिन बुखार होना और बाद में लगातार बारिश के कारण रबर की पैदावार बहूत कम हुआ है। निर्यात किया गया 56,545 टणों की औसत दाम आर.एस.एस 4 की 9204 रुपये प्रति किनटल (per quintal) थे और आयात किया गया 89,699 टणों की औसत दाम आर.एस.एस 3 की 9779 प्रति किनटल थे। जब सारे हिसाब प्राप्त होगा तब यह मालूम पडेगा कि आयात निर्यात की दाम इन दामों से नीचे होगा।लेकिन 89,699 टणें 8698 रु प्रति किन्टल की हिसाब से हुआ।
निर्यात करनेवाले दामों में भारत के निर्माताओं को आयात के बदले में देना चाहिये। ऐसे आयात निर्यात से घाटा बहूत ही बडा रकम हैं।
कीबोर्ड की जानकारि केलिये कुच्छ वक्त और लगेगा। हिंन्दी inscript इस्तेमाल कर रहा हूँ। Phonetic कीबोर्ड ठीक नहीं चला सकता। मैक्रो सोफ्ट झोडने से वैरस की आक्रमण खतम हो गया। अब मुझे वैरस की डर बिलकुल नहीं। मैं ने ubuntu free CD काा माँग की और डाक घर की जरिये मिल भी गया।
“अब तो मैं स्वतंत्र हो गया।”
अगर आप को free CD चाहिए तो यह पन्ने पर उपलब्द हैं।
ताजा खबर यह हैं कि “2007 अक्टोबर 18 को रिलीज़” हुए उबुण्टु 7.10 हैं। अगर आप के पास 7.04 हैं तो अप्ग्रेड कर सकते हैं।
रबड बोर्ड की हिन्दी सैटएक्सप्लोरर पेज में पढ सकते हैं। लेकिन जब फयर फोक्स में पढने की कोशिश की तब मुझे नीचे दिया हआ चित्र जैसे नजर आया। रबर बोर्ड की पन्ने से कोइ बाक्य चुनकर सेर्च करने पर हिन्दी की सैटें नजर नहीं आ रहे हैं।
फयरफोक्स में।
एक्सप्लोरेर में।
रबर बोर्ड की सैट यूणिकोड न होने का कारण विविध प्रकार की सेरच एनजिन के भायदे नहीम उठा सकेगा। उसी कारण अगर एक लब्ज ’रबर’ जाँच करेगा तो मिलेगा मेरा पन्ना। रबर बोर्ड की सैट में जाकर रबर लब्ज को नकल करके जाँच करेगा को यह जवाब मिलेगा।
जूण अच्छा हुआ हिन्दी में प्रसारित करके मेरा विश्लेषण सही स्थापित करने में मदत हो सकता हैं।
जैसे गेहू की कम दामों में निर्यात करने के बाद भारत में फसल काटन के बाद किसानों से कम दामों में जमा करने केलिये मेहंगे दामों आयात होगा वैसे ही रबर का भी आयात निर्यात होता हैं।
एक्स्प्लोरर में से पेस्ट करने पर ऐसे होगा। “·é¤ÀU çÎÙ ÂãUÜð ãUÙèȤ ·¤æð ¥æÌ¢·¤è ÕÌæÙð ÂÚU ÌéÜè Áæ´¿ °Áð´çâØæ´ ¥Õ Ì·¤ ·¤æð§ü ¥ãU× âÕêÌ ÙãUè´ ç×ÜÙð âð ¥ÂÙè ·¤æØüàæñÜè ·¤æð Üð·¤ÚU â߿ܿð¢ ×ð´ çƒæÚU »§ü ãUñ¢Ð
फयरफोक्स में Padma 0.4.11 इनस्टाल करने से फायदा सबको।
यह चित्र में दैनिकभास्कर फयरफोक्स पर यूनिकोड में नजर आ रहे हैं।
यह मैं ने “दैनिक भासकर” से नकल किया हुआ हैं।
अर्द्धनग्न परेड की वजह कुछ और..!
गुजरात में अपने पति व सास के खिलाफ उत्पीड़न व दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाने वाली पूजा चौहान दरअसल बचपन से ही यौन शोषण का शिकार रही है।
पेज फ्लेक्स (अब नई हैं) जॊ मैं ने शुरु की हैं।आप लॊगभी शुरु कर सकते हैं। मुझे इतना ज्यादा जान्कारी नहीं हैं। मेरा पन्ना षेयर किया हुआ है। इस्लिये सब देख सक्ते हैं। गूगिल रीडर पेज फीड आदि उस में जोड सकते हैं।
यह मेरा दूसरा पन्ना हैं जो दोस्तों को बाटा गया हैं। हर चीज को घसीडकर और पन्नों में ले जा सकते हैं। ऐसे जितने भी पन्ने बना सक्ते हैं। आप को जो जरूरत है वह सबकुच्छ यहाँ इकटा कर सकता हैं। याने कि सब्कुच्छ एक ही खिडकी में।
याहू की ’पैप्स’ के जरिये आप जो ताजा ब्लोग पोस्ट पब्लिष करेग आप के गूगिल रीडर में अपने आप आ जायेगा। मेरा और नार्द यहू पैप्स में नीचे दियाहुआ लिंग में क्लिक करें। उसमें जो subscribe दिया हुआ हैं उस में क्लिक करके Add to Google दबायें। जो पन्ना आपके सामने आयेगा उस में Add to Google Reader को चुनें। गूगिल रीडर के कमाल आप खूद देख सकते है।
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जो दहने की तरफ ऊपर settings की बाये तरफ हारे रंग के circle के अंदर एक आरो नजर आ रहा हैं वह online के निशानि हैं। उसपर दबाने से गूगिल रीडर save कर सक्ते हैं। बाद में बिना नेट के ओफ लैन में पढ सकता हैं।
दिल्ली से कल ही लौटे. टैक्सी घर के सामने रुकी तो छोटा बेटा विद्युत बाहर ही खड़ा था . सामान लेकर अन्दर पहुँचे तो घर साफ-सुथरा पाकर मन प्रसन्न हो गया. एकाध नुक्सान को नज़र अन्दाज़ करना ज़रूरी होता है सो
संघ में बहुत सक्रिय थे तो मां-बाप ने सोचा कि शादी करा दो, सब ठीक हो जाएगा और तब हमारी शादी हो गयी। राजस्थान के एक विधायक ने राजस्थान में बाल-विवाह के मसले पर एनडीटीवी को ये बाइट दी है। जाहिर है
******पीपल की छाँव में कुछ पत्ते ******पत्तेअक्सर टूट कर गिर जाते हैंया जला दिये जाते हैंजैसे दहेज लोभ में नारी॥पत्तेअक्सर पूजे जाते हैंकभी बेल के, कभी पीपल केजैसे चुनाव में जनता॥पत्तेअक्सर कुचले
शक्कर के देशी रूप को आमतौर पर खांड़ के रूप में जाना जाता है। बेहद प्रचलित यह शब्द संस्कृत के खण्डः से बना है जिसका एक अर्थ है टुकड़ा, पिण्ड, ईख-गन्ना अथवा कच्ची चीनी । खंड या खांड़ आज करीब करीब सभी
एक खिड़की खोलीदूसरी खोलीदिखा कुछ औरदृश्य का नया कोणखोली तीसरीउसी दृश्य में दिखा नया धरातलव्योमखोली चौथीघुस आया जैसे विहंगम कमरे मेंइतना कुछ यहीं एक जगहपर इतने व्यस्त की देख नहीं पाताकिसी मुक्ति की
हंसी-खेल में कहीं नस सरक जायेया पैर की उंगलियों के बीच जानेकहां से सरककर एक कंकड़चला आये, छूटा-दबा रह जायेऔर अचानक गड़े ऐसे कि मुंहसे कसकती एक कराह छूटेचटककर कहीं कुछ भीतर टूटेवैसे ही रहते-रहते
देश के जाने माने गायक और संगीतविद पं फ़िरोज़ द्स्तूर का नौ मईको रात नौ बजे मुंबई में देहांत हो गया। 89 वर्ष के पं दस्तूर किराना घरानेके रौशन चिराग़ थे। आज जब मेरे हारमोनियम वादक मित्र श्री सुधीर नाईकने
महंगाई किसी भी सरकार के लिए जी का जंजाल है । कीमतें गिरती हैं तो जनता-भी खुश और सरकार भी खुश । इसीलिए सरकार हर हफ्ते मुद्रा स्फीति के आंकडे प्रस्तुत करती रहती है । लेकिन लोंगो को पता नही क्यों इन
विस्फोट नाम ब्लागवाणी पर दिखा तो दो तरह की प्रतिक्रियाएं मिली हैं. क्या मैथिली जी डर गये? या फिर संजय तिवारी झुक गये. मैथिली जी किससे डरेंगे और क्यों? हां संजय तिवारी झुक गया है. लेट गया है, दंडवत हो
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आज बहुत महीनों के बाद फुरसत मिली है , कुछ लिखने की \सोचने मे ही अक्सर वक्त बीत जाता था\ रोज मराह की जिंदगी से अब थोडी फुरसत है के कुछ अपनी पसंद का करे , मन चाहा वक्त बिताये \ गर्मियों की छुत्तिया तो
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अभी कल ही क़ी बात है। देश का सबसे उम्रदराज 24 घंटे का हिन्दी न्यूज़ चैनल करवट बदल रहा था। सभी की निगाहें टिकी हुईं थी- एक नई शुरुआत पर। तय समय था रात के 9 बजकर 56 मिनट। ठीक समय पर चैनल के "लोगो"
क्रिकेटर वेश्याओं से अलग नहीं होते...महेश भट्ट की फ़िल्म जन्नत का ये डायलॉग कितने विवादों को जन्म देगा, ये तो नहीं पता। लेकिन इतना ज़रूर है कि इस संवाद से बिंदास महेश भट्ट को कोई चिंता नहीं. फ़िल्म
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फिल्म कामेडी हो या सस्पेंस या फिर सामाजिक रूप में प्रासंगिक, दर्शक उन्हीं फिल्मों को पसंद करते हैं, जो अच्छी बनी हो। पिछले हफ्ते की रिलीज फिल्मों को देखें तो तीनों फिल्में अलग-अलग मिजाज की थीं।
मेरे वाराणसी के पैतृक निवास से मेरा गाज़ीपुर में स्थित ननिहाल कुछ अस्सी किलोमीटर दूर है। आजकल अगर जाना हो तो कार से २ घंटे या ट्रेन से सब मिला जुला कर तीन-चार घंटे लगते हैं। इस गाँव से सबसे नजदीकी शहर
आज एक समाचार पत्र के सम्पादकीय पृष्ठ पर जाने माने पत्रकार और फिल्म निर्माता प्रीतीश नंदी का एक लेख प्रकाशित हुआ है। लेख में नंदी ने बीस साल पहले इलस्ट्रेड वीकली में अमिताभ
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